कबीरा संगति साधु की , जित प्रीत कीजै जाय। दुर्गति दूर वहावति , देवी सुमति बनाय॥ 155॥
“With Kabir, the company of sages, how can love be achieved? Danger departs from there, and Goddess bestows good intellect.”
— कबीर
अर्थ
कबीरा संगति साधु की, जहाँ प्रेम किया जा सकता है, वहाँ से संकट दूर हो जाता है और देवी अच्छी बुद्धि प्रदान करती हैं।
विस्तार
यह दोहा हमें समझाता है कि नेक लोगों की संगत कितनी अनमोल होती है। जब हम संतों या साधुओं के साथ बैठते हैं, तो वहाँ सच्ची प्रीति, यानी प्रेम की भावना अपने आप जागृत हो जाती है। उनकी संगति से हमारे सारे दुख-दर्द और बुराइयाँ दूर हो जाती हैं, जैसे कोई नदी अपने साथ कूड़ा-करकट बहा ले जाती है। और फिर, इसी अच्छी संगत के प्रभाव से, हमें देवी सरस्वती की कृपा मिलती है और हमारी बुद्धि अच्छी बातों से भर जाती है।
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