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सद ख़ानुमाँ-ख़राब हैं हर हर क़दम पे दफ़न कुश्ता हूँ यार मैं तो तिरे घर की राह का

In every step, the grave seems to lie in wait, I am a corpse, but I walk the path to your gate.

मीर तक़ी मीर
अर्थ

हर कदम पर क़ब्र दफ़न है, मैं तो तेरा घर जाने वाले रास्ते का शव हूँ।

विस्तार

यह शेर महबूब से प्रेम करने वाले दिल की हकीकत बयां करता है। शायर कहते हैं कि मंज़िल की राह पर... हर कदम पर मुसीबतें दफ़न हैं। लेकिन आशिक़ का कहना है कि मैं तो इस राह का क़ैदी हूँ। मेरा वजूद, मेरी रूह... सब उसी मंज़िल की तरफ़ खिंचा चला आ रहा है। यह एक ऐसी मजबूरी है जो सिर्फ़ इश्क़ ही पैदा कर सकता है।

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