“In grief over my lost nest, so many straws did I collect / That turning into a nest at last, they brought my heart solace and rest.”
अपने घोंसले के ग़म में मैंने इतने तिनके जमा किए कि आख़िरकार वे खुद एक घोंसला बनकर मेरे सुकून का जरिया बन गए।
इस शे'र में ग़म से उबरने और नए सिरे से ज़िंदगी को संवारने की बेहद ख़ूबसूरत दास्तान है। शायर कहता है कि जब उसका घोंसला उजड़ गया, तो उस सदमे में उसने दीवानों की तरह बिखरे हुए तिनके चुनना शुरू किया। हैरानी की बात यह हुई कि रोते-बिलखते जमा किए गए वही तिनके धीरे-धीरे फिर से एक नया आशियाना बन गए, और जिस दर्द ने उसे बिखेरा था, वही आख़िरकार उसके दिल के सुकून की वजह बन गया।
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