कुछ आगे बढ़ चले सामान-ए-राहत ला-मकाँ हो कर फ़लक पीछे रहा जाता है गर्द-ए-कारवाँ हो कर

“Beyond the bounds of space, our means of peace have surged far ahead; while the heavens lag behind, reduced to mere dust from our caravan.”

— नज़्म तबातबाई
अर्थ

हमारे सुकून और राहत के साधन सीमाओं से परे होकर बहुत आगे निकल गए हैं, और आसमान हमारे क़ाफ़िले की धूल बनकर पीछे छूटता जा रहा है।

विस्तार

यहाँ शायर अपनी रूहानी परवाज़ और सुकून की तलाश को एक असीम सफ़र के रूप में देख रहा है। वह कहता है कि हमारे दिल का सुकून और मंज़िल अब इस भौतिक दुनिया और मकान की सीमाओं से परे जा पहुँची है। हमारी रूह का कारवाँ इतनी तेज़ी और बुलंदी से आगे बढ़ रहा है कि पूरा आसमान भी उसके पीछे महज़ रास्ते की धूल बनकर छूट गया है, जो इंसान के हौसले और रूहानी आज़ादी की इंतेहा को बयां करता है।

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

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