किसी दिन तो चले ऐ आसमाँ बाद-ए-मुराद ऐसी कि उतरें कश्ती-ए-मय पर घटाएँ बादबाँ हो कर

“May such a wind of fortune blow someday, O sky, / That gathering clouds descend as sails upon the boat of wine.”

— नज़्म तबातबाई
अर्थ

ऐ आसमान, किसी दिन तो मुरादों की ऐसी अनुकूल हवा चले कि काले बादल शराब की कश्ती पर पाल बनकर उतर आएँ।

विस्तार

शायर आसमान से एक दिली ख़्वाहिश ज़ाहिर करते हुए कहता है कि काश कभी ऐसी मुरादों भरी हवा चले जो ज़िंदगी में खुशियों का सैलाब ले आए। यहाँ ख़ूबसूरत तसव्वुर यह है कि सावन की काली घटाएँ शराब के प्याले पर पाल बनकर उतर आएं और मस्ती का यह सफ़र चल पड़े। यह शेर दरअस्ल मायूसी के दौर में उम्मीद, जश्न और ज़िंदगी की पुरजोश रवानी की दुआ है।

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

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