जो निकली होगी कोई आरज़ू तो ये भी निकलेगा तुम्हारा तीर-ए-हसरत बन गया दिल में निहाँ हो कर

“If ever a hidden yearning emerges, this too shall surely depart; having lain concealed so long, your arrow has turned into a longing within my heart.”

— नज़्म तबातबाई
अर्थ

तुम्हारा तीर दिल में छुपकर अब एक हसरत बन चुका है। अगर कभी दिल से कोई और इच्छा बाहर निकलेगी, तो यह भी उसी के साथ बाहर आ जाएगा।

विस्तार

यहाँ आशिक़ महबूब के तीर यानी उसके दिए ज़ख़्म को याद कर रहा है, जो सीने में इतनी गहराई से छुप गया है कि अब वह कोई चोट नहीं, बल्कि एक प्यारी सी हसरत बन चुका है। शायर कहते हैं कि दिल से अगर कभी कोई ख़्वाहिश बाहर निकलेगी, तो यह तीर भी उसी के साथ निकलेगा। यानी महबूब का दिया दर्द अब आशिक़ के वजूद और उसकी उम्मीदों में इस कदर घुल-मिल गया है कि उसे अलग नहीं किया जा सकता।

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