जवाब नामे का क़ासिद मज़ार पर लाया कि जानता था उसे ताब-ए-इंतिज़ार नहीं

“The messenger brought the letter's reply straight to the grave, / For well he knew he lacked the endurance to bear the wait.”

— नज़्म तबातबाई
अर्थ

संदेशवाहक पत्र का उत्तर सीधे मज़ार पर लेकर आया, क्योंकि वह जानता था कि उसमें इंतज़ार बर्दाश्त करने की ताक़त नहीं थी।

विस्तार

इस शेर में इंतज़ार का ऐसा दर्दनाक मंज़र है जो दिल को छू जाता है। आशिक़ अपने महबूब के जवाब की राह तकते-तकते अपनी जान दे बैठा, क्योंकि उसमें जुदाई और सब्र की ज़रा भी ताब नहीं थी। क़ासिद भी उसकी इस बेकरारी को समझता था, इसलिए ख़त का जवाब सीधे उसकी क़ब्र पर लेकर पहुँचा। यह उस कड़वी विडंबना को बयां करता है जहाँ मोहब्बत में जवाब तो आया, मगर ज़िंदगी की डोर टूटने के बाद।

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