“In what a breathless rush did life's caravan pass by, that I saw tomorrow veiled in the rising dust of yesterday.”
जिंदगी का कारवां इतनी आपाधापी और तेज़ी से गुज़र गया कि मुझे आने वाला कल बीते हुए कल की उड़ती धूल में नज़र आया।
यह शेर ज़िंदगी की बेतहाशा रफ़्तार और वक़्त के फ़िसल जाने के अहसास को बड़े ख़ूबसूरत अंदाज़ में बयां करता है। शायर कहता है कि ज़िंदगी का कारवां इतनी हड़बड़ी और तेज़ी से गुज़र गया कि आने वाला कल (फ़र्दा) मुझे बीते हुए कल की उड़ती धूल में ही खोया हुआ नज़र आया। इसका गहरा भाव यह है कि हम गुज़रे हुए वक़्त के असर और उसकी यादों की गर्द में इतने उलझे रह जाते हैं कि मुस्तक़बिल (भविष्य) का साफ़ दीदार तक मुमकिन नहीं हो पाता।
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