“Having teased you, O Nazm, we are filled with regret; who knew, cruel one, that you would weep in mere jest?”
ऐ नज़्म, हम तुम्हें छेड़ कर बहुत पछता रहे हैं; हमें क्या मालूम था कि तुम मज़ाक-मज़ाक में ही रो पड़ोगे।
यह शे’र उस नाज़ुक और चुभते हुए पल को बयान करता है जब बेतकल्लुफ़ हँसी-मज़ाक अनजाने में किसी के छुपे हुए दर्द को कुरेद देता है। शायर ने तो महज़ दिल-लगी में छेड़छाड़ की थी, मगर सामने वाले के आँसू छलकते ही सारा मज़ा अफ़सोस और शर्मिंदगी में बदल गया। रोने वाले को प्यार से 'ज़ालिम' कहना एक ख़ास अपनापन और चुहल दिखाता है, जो यह एहसास कराता है कि अक्सर मुस्कुराहटों के पीछे बहुत नाज़ुक और थके हुए दिल छुपे होते हैं।
Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.
ऑडियो
Free — just your email. You'll come right back here.
No comments yet. Be the first.
