सज्दा का हुक्म मुझ को तू ने तो अब दिया है पहले ही लिख चुका हूँ मैं ख़त्त-ए-बंदगी में

“The command to bow before You, You have issued only now; yet long ago I had inscribed it in the covenant of servitude.”

— नज़्म तबातबाई
अर्थ

तूने मुझे सजदा करने का हुक्म तो अब दिया है, जबकि अपनी बंदगी और आजिज़ी के इक़रारनामे में यह बात मैं पहले ही लिख चुका हूँ।

विस्तार

यहाँ आशिक़ अपने महबूब या ईश्वर से बड़े नाज़ और आत्मीयता से कह रहा है कि सजदा करने का हुक्म तो आपने मुझे आज दिया है, पर मैंने तो बहुत पहले ही अपने समर्पण के अहदनामे में यह लिख दिया था। यह शेर बताता है कि सच्ची मोहब्बत किसी फरमान की मोहताज नहीं होती, जहाँ दिल पहले ही सब कुछ न्योछावर कर चुका हो। इसमें सर झुकाना कोई औपचारिक रस्म नहीं, बल्कि रूह का वो पुराना फैसला है जो किसी हुक्म से बहुत पहले लिया जा चुका था।

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

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