तसव्वुर शम्अ का जिस को जिला दे हूँ वो परवाना लग उट्ठी आग दिल में जब नज़र आया धुआँ मुझ को

“I am that moth consumed by the mere thought of the candle's flame; a blaze flared in my heart the moment I caught sight of smoke.”

— नज़्म तबातबाई
अर्थ

मैं वह पतंगा हूँ जिसे शमा का महज़ ख़याल ही जला देता है; जैसे ही मुझे कहीं धुआँ दिखाई दिया, मेरे दिल में आग भड़क उठी।

विस्तार

परवाना तो शम्अ की लौ को छूकर जलता है, लेकिन यहाँ आशिक़ की दीवानगी इस हद तक है कि महज़ शम्अ की कल्पना ही उसे जला देती है। दूर कहीं उठता धुआँ देखकर ही उसके दिल में इश्क़ की आग भड़क उठती है। यह शेर मुहब्बत की उस नाज़ुक और बेपनाह शिद्दत को बयां करता है, जहाँ महबूब का सिर्फ़ एक ख्याल ही पूरे वजूद को तपा देने के लिए काफ़ी होता है।

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