“My dying eyes remain fixed upon the swordsman still; leaving me half-slain, he has moved toward the deer.”
मेरी मरती हुई आँखें उस तलवार चलाने वाले की ओर टिकी हैं, जो मुझे घायल और तड़पता हुआ छोड़कर हिरन के शिकार की तरफ़ बढ़ गया है।
इस शेर में आशिक़ की तड़प और माशूक़ की बेपरवाही का बड़ा मार्मिक मंज़र है। प्रेमी ज़ख़्मी होकर ज़मीन पर पड़ा है और उसकी पथराती आँखें अब भी अपने क़ातिल की तरफ़ लगी हैं, मगर बेपरवाह माशूक़ उसे अधमरा छोड़कर किसी नए शिकार की तलाश में हिरन के पीछे चल पड़ा है। यह इश्क़ की उस बेबसी को दिखाता है जहाँ जान भी जा रही है, फिर भी दिल को सिर्फ़ इस बात का रंज है कि महबूब कितनी बेदर्दी से मुँह मोड़ गया।
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