ऐ ''नज़्म'' जिस को चाहे वो दे बहिश्त दोज़ख़ नमरूद क्या करेगा शद्दाद क्या करेगा

“O Nazm, to whomever He wills, He grants paradise or hell; What can Nimrod ever do, what power can Shaddad compel?”

— नज़्म तबातबाई
अर्थ

ऐ नज़्म, ईश्वर जिसे चाहे जन्नत या दोज़ख़ देता है; उसकी मर्ज़ी के आगे नमरूद और शद्दाद जैसे तानाशाह कुछ नहीं कर सकते।

विस्तार

इस शेर में शायर 'नज़्म' नमरूद और शद्दाद जैसे अहंकारी बादशाहों की मिसाल देकर समझाते हैं, जिन्होंने अपनी ताकत के नशे में ख़ुदा की सत्ता को ललकारा था। शायर कहते हैं कि जन्नत या दोज़ख़ का फ़ैसला सिर्फ़ और सिर्फ़ परवरदिगार की मर्ज़ी पर निर्भर करता है, किसी इंसान के हाथ में यह नहीं। दुनिया के बड़े से बड़े ज़ालिम और दौलतमंद हुक्मरान भी किसी की रूहानी तक़दीर को तय करने के मामले में बिल्कुल लाचार हैं।

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

ऑडियो

पाठUnavailable
हिंदी अर्थUnavailable
अंग्रेज़ी अर्थUnavailable
हिंदी विस्तारUnavailable
अंग्रेज़ी विस्तारUnavailable
Comments · 0

Free — just your email. You'll come right back here.

No comments yet. Be the first.

← Prev14 / 14