ग़ज़ल

पुर्सिश जो होगी तुझ से जल्लाद क्या करेगा

پرسش جو ہوگی تجھ سے جلاد کیا کرے گا
नज़्म तबातबाई· Ghazal· 14 shers· radif: करेगा

यह ग़ज़ल प्रेम, आत्म-बलिदान और क्षमा के गहरे भाव को दर्शाती है। इसमें प्रेमी अपने हत्यारे को बख़्श कर ज़ुल्म की निरर्थकता को उजागर करता है, जहाँ क्रूरता के मुक़ाबले प्रेम का निस्वार्थ समर्पण विजयी सिद्ध होता है।

Source: rekhta · HI

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लिपि व अर्थ
1
पुर्सिश जो होगी तुझ से जल्लाद क्या करेगा ले ख़ून मैं ने बख़्शा तू याद क्या करेगा
ऐ जल्लाद, जब तुझसे मेरे क़त्ल का हिसाब माँगा जाएगा तो तू क्या करेगा? ले, मैंने अपना ख़ून माफ़ किया, तू भी क्या याद रखेगा।
2
हूँ दाम में पुर-अफ़्शाँ और सादगी से हैराँ क्यूँ तेज़ की हैं छुरियाँ सय्याद क्या करेगा
मैं जाल में फंसा फड़फड़ा रहा हूँ और अपनी मासूमियत में हैरान हूँ कि शिकारी ने छुरियाँ क्यों तेज़ की हैं और वह क्या करने वाला है।
3
ज़ालिम ये सोच कर अब देता है बोसा-ए-लब जब होंट सी दिए फिर फ़रियाद क्या करेगा
ज़ालिम महबूब यह सोचकर अब मेरे होंठों को चूम रहा है कि जब मेरे होंठ ही सी दिए जाएँगे, तो फिर मैं फ़रियाद कैसे कर सकूँगा।
4
ज़ंजीर तार-ए-दामाँ है तौक़ इक गरेबाँ ज़ोर-ए-जुनूँ न कम हो हद्दाद क्या करेगा
दामन का एक धागा ही ज़ंजीर और फटा हुआ गिरेबान तौक़ बन गया है; अगर दीवानेपन की शिद्दत कम न हो, तो लोहार ज़ंजीरें बनाकर भी क्या कर लेगा?
5
हम डूब कर मरेंगे हसरत रहेगी तुझ को जब ख़ाक ही न होगी बर्बाद क्या करेगा
हम डूब कर अपनी जान दे देंगे ताकि तुम्हें पछतावा रहे; जब हमारी राख या मिट्टी ही नहीं बचेगी, तो तुम किसे बर्बाद करोगे?
6
याक़ूब क़त्अ कर दें उम्मीद-ए-वस्ल दिल से यूसुफ़ सा बंदा कोई आज़ाद क्या करेगा
याक़ूब को अपने दिल से मिलन की उम्मीद पूरी तरह छोड़ देनी चाहिए, क्योंकि यूसुफ़ जैसे अनमोल ग़ुलाम को भला कोई क्यों आज़ाद करेगा?
7
दिल ले के पूछता है तू किस का शेफ़्ता है भूला अभी से ज़ालिम फिर याद क्या करेगा
मेरा दिल छीन लेने के बाद भी तू पूछता है कि तू किस पर फ़िदा है। हे ज़ालिम, जब तू अभी से ही सब भूल गया है, तो आगे चलकर क्या याद रखेगा।
8
ऐ ख़त्त-ए-ब्याज़ आरिज़ दरकार है जो तुझ को तहरीर हुस्न की कुछ रूदाद क्या करेगा
ऐ नए ख़त (गाल के रोएँ), अगर तुझे लिखने के लिए माशूक़ का गोरा रुख़सार ही चाहिए, तो फिर कोई तहरीर हुस्न की दास्तान क्या ख़ाक बयान कर सकेगी?
9
कुंज-ए-क़फ़स से इक दिन होगी रिहाई अपनी मर जाएँगे तो आख़िर सय्याद किया करेगा
पिंजरे के इस कोने से एक दिन हमारी रिहाई ज़रूर होगी; आख़िर जब हम मर जाएँगे, तो शिकारी हमारा क्या कर लेगा?
10
मिस्ल-ए-सिपंद दिल है बेताब सोज़-ए-ग़म में रह जाएगा तड़प कर फ़रियाद क्या करेगा
ग़म की जलन में दिल हरमल के दाने की तरह तड़प रहा है; यह बस तड़प कर ही रह जाएगा, कोई फ़रियाद भी क्या कर सकेगा।
11
ऐ शैख़ भर गया है क्यूँ वाज़ की हवा में रीश-ए-सफ़ेद अपनी बर्बाद क्या करेगा
ऐ शैख़, तुम उपदेश देने के घमंड की हवा में क्यों फूल रहे हो? क्या तुम इस तरह अपनी बुज़ुर्गी और सफ़ेद दाढ़ी की लाज बर्बाद करोगे?
12
ज़ुल्म-ओ-सितम से भी अब ज़ालिम ने हाथ खींचा इस से सितम वो बढ़ कर ईजाद क्या करेगा
अत्याचारी ने अब ज़ुल्म और सितम करने से भी हाथ खींच लिया है; अब वह इससे बढ़कर और क्या नया सितम ईजाद करेगा?
13
अज़-बस-कि बे-हुनर हूँ मैं नंग-ए-मो'तरिज़ हूँ मज़मूँ पे मेरे कोई ईराद क्या करेगा
चूँकि मैं पूरी तरह से हुनर से महरूम हूँ और आलोचकों के लिए एक कलंक हूँ, इसलिए कोई मेरे कलाम या विचार पर क्या ही एतराज़ जताएगा।
14
ऐ ''नज़्म'' जिस को चाहे वो दे बहिश्त दोज़ख़ नमरूद क्या करेगा शद्दाद क्या करेगा
ऐ नज़्म, ईश्वर जिसे चाहे जन्नत या दोज़ख़ देता है; उसकी मर्ज़ी के आगे नमरूद और शद्दाद जैसे तानाशाह कुछ नहीं कर सकते।
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