ऐ शैख़ भर गया है क्यूँ वाज़ की हवा में रीश-ए-सफ़ेद अपनी बर्बाद क्या करेगा

“O Sheikh, why are you so puffed up with the wind of your sermons? Will you bring to ruin the honor of your white beard in vain?”

— नज़्म तबातबाई
अर्थ

ऐ शैख़, तुम उपदेश देने के घमंड की हवा में क्यों फूल रहे हो? क्या तुम इस तरह अपनी बुज़ुर्गी और सफ़ेद दाढ़ी की लाज बर्बाद करोगे?

विस्तार

इस शे’र में शायर धर्मोपदेशक (शैख़) पर बड़े ही चुटीले अंदाज़ में तंज़ कस रहा है, जो अपने ही उपदेशों के घमंड में हवा की तरह फूल गया है। 'हवा भरना' यहाँ खोखले अहंकार का प्रतीक है, जबकि 'सफ़ेद दाढ़ी' उम्र के साथ मिलने वाले मान-सम्मान और संजीदगी की निशानी है। शायर दोस्त बनकर बस यही समझा रहा है कि दूसरों को नसीहतें देने के फेर में अपनी ही बुज़ुर्गी और गरिमा को यूँ ज़ाया मत करो।

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

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