अज़-बस-कि बे-हुनर हूँ मैं नंग-ए-मो'तरिज़ हूँ मज़मूँ पे मेरे कोई ईराद क्या करेगा

“So utterly devoid of skill, I am a disgrace to any critic's art; who would ever deign to find fault in the verses of my heart?”

— नज़्म तबातबाई
अर्थ

चूँकि मैं पूरी तरह से हुनर से महरूम हूँ और आलोचकों के लिए एक कलंक हूँ, इसलिए कोई मेरे कलाम या विचार पर क्या ही एतराज़ जताएगा।

विस्तार

इस शेर में कमाल का तंज़ और सादगी भरी चतुराई है। शायर ख़ुद को इतना बे-हुनर बता रहा है कि उस पर ऐब निकालना भी किसी आलोचक के लिए अपनी तौहीन जैसा होगा। इस ज़ाहिरी आजिज़़ी और बेबसी की आड़ में दरअस्ल एक गहरा इत्मीनान छिपा है—जब कोई ख़ुद को हर हुनर की बंदिश से परे मान ले, तो दुनिया की कोई भी नुक्ताचीनी उसे छू तक नहीं सकती।

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

ऑडियो

पाठUnavailable
हिंदी अर्थUnavailable
अंग्रेज़ी अर्थUnavailable
हिंदी विस्तारUnavailable
अंग्रेज़ी विस्तारUnavailable
Comments · 0

Free — just your email. You'll come right back here.

No comments yet. Be the first.