“No grief from stones of cruelty, no fear of grasping hands; upon a tree that bears no fruit, my humble shelter stands.”
मुझे न तो ज़ुल्म के पत्थरों का कोई दुख है और न ही किसी तलबगार हाथ का कोई डर, क्योंकि मेरा घोंसला उस पेड़ पर बना है जो फलदार नहीं है।
शायर यहाँ एक बहुत ही गहरी और सुकून देने वाली बात कह रहे हैं कि दुनिया केवल उन्हीं पेड़ों पर पत्थर फेंकती है या हाथ बढ़ाती है जिन पर मीठे फल लगे हों। उन्होंने अपना बसेरा जान-बूझकर एक ऐसे पेड़ पर बनाया है जो फलदार नहीं है, इसलिए उन्हें न तो ज़माने की ज़्यादती का डर है और न किसी के लालच का। यह शेर बड़ी सादगी से सिखाता है कि जब आपके पास दुनिया को लुभाने वाली चीज़ें नहीं होतीं, तो आप ईर्ष्या और नुकसान से पूरी तरह आज़ाद और महफ़ूज़ हो जाते हैं।
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