“Hear me, O travelers of the caravan, I am no guide to lead; yet I see that not a single one among you walks upon the path.”
ऐ क़ाफ़िले के लोगो सुनो, मैं कोई मार्गदर्शक या राह दिखाने वाला नहीं हूँ; फिर भी मैं देख रहा हूँ कि तुममें से कोई भी सही रास्ते पर नहीं चल रहा है।
यह शेर समाज की अंधी दौड़ और दिशाहीनता पर एक बड़ी ही मार्मिक चोट है। शायर बड़ी विनम्रता से कहता है कि वह कोई बड़ा रहनुमा या पथ-प्रदर्शक नहीं है, लेकिन इस कड़वे सच को कैसे अनदेखा कर दे कि क़ाफ़िले का हर शख़्स भटका हुआ है। 'राहबर' और 'राह पर' के खूबसूरत लफ़्ज़ी खेल के ज़रिए यह दिखाया गया है कि जब पूरा समाज ही भटके हुए रास्ते पर चल पड़े, तो एक साधारण इंसान भी सच पुकारने पर मजबूर हो जाता है।
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