कोशक ओ क़स्र ओ बाम-ओ-दर तू ने बिना किए तो क्या हैफ़ है ख़ानुमाँ-ख़राब दिल में किसी के घेर नहीं

“So what if you raised palaces, towers, and portals high? / Alas, ruined soul, you found no home in anyone's heart.”

— नज़्म तबातबाई
अर्थ

अगर तुमने महल, अट्टालिकाएँ, छतें और ऊँचे दरवाज़े बना भी लिए तो क्या हुआ? अफ़सोस की बात है, ऐ उजड़े हुए इंसान, कि तुम किसी के दिल में अपनी कोई जगह नहीं बना सके।

विस्तार

शायर यहाँ दुनियावी दौलत और शान-ओ-शौकत की असलियत बड़े मार्मिक ढंग से बयां कर रहा है। वह कहता है कि अगर तुमने आलीशान महल, ऊँचे कंगूरे और भव्य दरवाज़े बना भी लिए, तो क्या हासिल हुआ? असली ठिकाना ईंट-पत्थरों की इमारतों में नहीं, बल्कि किसी अपने के दिल में मिलने वाली मोहब्बत में होता है; अगर किसी के दिल में तुम्हारी जगह नहीं, तो इस सारी तड़क-भड़क के बावजूद तुम अंदर से बेघर और उजड़े हुए ही हो।

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

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