कह दिया मैं ने सहर है झूट-मूट हो गए बेदार क्यूँ कैसी कही

“I said in playful jest, 'The dawn is here!' / Why did you wake? How well I tricked you so!”

— नज़्म तबातबाई
अर्थ

मैंने तो बस यूँ ही झूठ-मूठ कह दिया था कि सुबह हो गई है; आप जाग क्यों गए, बताइए कैसी रही मेरी बात!

विस्तार

इस शेर में महबूब के साथ की जाने वाली एक बहुत ही प्यारी और नटखट छेड़छाड़ नज़र आती है। शायर ने सिर्फ़ मज़ाक में कह दिया कि सुबह हो गई, और महबूब मिलन की रात ख़त्म होने के डर से या अपनी मासूमियत में फौरन जाग उठा। अपनी इस छोटी सी शरारत के कामयाब होने पर शायर मुस्कुराते हुए इतरा रहा है, जो इश्क़ के बेहद निजी और दिलकश पलों की सादगी को बयां करता है।

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

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