“A fine pastime you have devised in your frenzy, O Haidar; tangled in tearing your collar, at least the heart finds some diversion.”
ऐ हैदर, तुमने दीवानेपन में यह अच्छा काम ढूंढ निकाला है कि गिरेबान फाड़ने में उलझने से कम से कम दिल तो बहल जाता है।
उर्दू शायरी में दीवानगी और इश्क़ के दर्द में गरेबाँ चाक करना (कपड़े फाड़ना) एक जानी-पहचानी अलामत है। शायर यहाँ हल्के-फुल्के अंदाज़ में खुद से मुख़ातिब होकर कहता है कि जब दिल की बेचैनी हद से बढ़ जाए, तो गरेबाँ से उलझना भी एक अच्छा बहाना बन जाता है। इस खुद-कलाम और ज़रा सी तंज़िया बात में गहरा दर्द छुपा है—जब अंदर का तूफ़ान न थमे, तो इंसान अपने ही जिस्म और लिबास से उलझकर अपने ग़म को बहलाने की कोशिश करता है।
Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.
ऑडियो
Free — just your email. You'll come right back here.
No comments yet. Be the first.
