बहार-ए-मय-कशी आई चमन की रुत बदलती है घटा मस्ताना उठती है हवा मस्ताना चलती है

“The spring of wine-drinking arrives, the garden's season turns anew; intoxicated clouds arise, and drunken winds blow through.”

— नज़्म तबातबाई
अर्थ

शराब पीने का मौसम आ गया है और बाग की ऋतु बदल रही है; मतवाली घटाएं उठ रही हैं और मदहोश हवा चल रही है।

विस्तार

इस शेर में शायर ने मौसम-ए-बहार के आने पर कुदरत के बदलते मिज़ाज को बेहद खूबसूरत अंदाज़ में बयां किया है। आसमान में उमड़ते बादल और बहती हुई हवाएं दोनों ही मस्त-मलंग होकर झूम रही हैं, मानो पूरी कायनात ही किसी मीठे सुरूर में डूब गई हो। यह सिर्फ शराब पीने की बात नहीं है, बल्कि ज़िंदगी और कुदरत की बेफिक्र खुशियों में खुद को भुला देने का एक प्यारा सा न्योता है।

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

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