लगा कर ज़ख़्म में टाँके क़ज़ा तेरी न आ जाए जो वो सफ़्फ़ाक सुन पाए बता ऐ चारा-गर क्या हो

“Lest your own death arrive as you stitch up my wound—tell me, O healer, what if that ruthless beloved should hear of this?”

— नज़्म तबातबाई
अर्थ

ऐ हकीम, कहीं मेरे ज़ख़्म सिलने के जुर्म में तुम्हारी ही मौत न आ जाए; ज़रा सोचो कि अगर उस ज़ालिम महबूब को इसका पता चल गया, तो क्या होगा?

विस्तार

यहाँ आशिक़ अपने हकीम या चारागर को एक दिलचस्प चेतावनी दे रहा है कि मेरे ज़ख़्मों को सीने की गुस्ताख़ी मत करो, कहीं ऐसा न हो कि मेरी बेरहम महबूब को ख़बर हो जाए और तुम्हारी ही मौत आ जाए! उर्दू शायरी में महबूब के दिए हुए ज़ख़्म कोई तकलीफ़ नहीं बल्कि इश्क़ की अनमोल निशानी होते हैं, जिन्हें मिटाना उस ज़ालिम माशूक़ को नाराज़ कर सकता है। इस शेर में आशिक़ का यह अलबेला अंदाज़ साफ़ झलकता है, जहाँ वह अपने इलाज से ज़्यादा अपने ज़ख़्मों की हिफ़ाज़त करना चाहता है।

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

ऑडियो

पाठUnavailable
हिंदी अर्थUnavailable
अंग्रेज़ी अर्थUnavailable
हिंदी विस्तारUnavailable
अंग्रेज़ी विस्तारUnavailable
Comments · 0

Free — just your email. You'll come right back here.

No comments yet. Be the first.