पाक-बाज़ाँ सूँ यूँ हुआ मफ़्हूम इश्क़ मज़मून-ए-पाक-बाज़ी है

“From those pure of heart, this meaning is understood: Love itself is the very theme of purity.”

— वली दकनी
अर्थ

पवित्र और निष्कपट लोगों से यह बात समझ आई है कि इश्क़ असल में पाकीज़गी का ही विषय है।

विस्तार

इस शेर में शायर बताते हैं कि पाकीज़ा और नेक दिल लोगों की सोहबत से यह राज़ खुला है कि सच्चा इश्क़ कोई मामूली जज़्बा नहीं, बल्कि खुद पवित्रता का दूसरा नाम है। इश्क़ में जिस्मानी चाहतों से ऊपर उठकर नीयत का साफ़ होना सबसे अहम होता है। जब दिल हर खोट से पाक हो, तभी मुहब्बत असल मायनों में इबादत का दर्जा पाती है।

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

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