“Through experience it has been revealed to me: coquetry is but the essence of indifference.”
तजुर्बे से मुझ पर यह बात ज़ाहिर हुई है कि नाज़ वास्तव में बेपरवाही या बे-नियाज़ी का ही मतलब है।
शायर यहाँ ज़िंदगी और इश्क़ के एक कड़वे तजुर्बे की बात कर रहा है। अक्सर आशिक़ महबूब के नखरे और अदाओं (नाज़) को प्यार भरी छेड़छाड़ समझ बैठता है, मगर वक़्त उसे सिखाता है कि यह कोई शोख़ी नहीं बल्कि मुकम्मल बेपरवाही और बे-नियाज़ी है। यह शेर उस चुभन भरे अहसास को बयां करता है जब इंसान को समझ आता है कि जिसे वह दिलकश अदा मान रहा था, वह दरअसल महबूब की मुकम्मल बेरुखी थी।
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