रख क़दम मुझ दीदा-ए-ख़ूँ-बार पर गर तुझे रंग-ए-हिना दरकार है

“Set your foot upon these blood-shedding eyes of mine, if it is the crimson hue of henna that you desire.”

— वली दकनी
अर्थ

अगर तुम्हें मेहंदी का लाल रंग चाहिए, तो मेरी इस ख़ून बहाने वाली आँख पर अपने क़दम रख दो।

विस्तार

इस शेर में आशिक़ अपनी दीवानगी और समर्पण की चरम सीमा को बयां कर रहा है। उर्दू शायरी में ख़ून के आँसू रोना गहरे विरह और दर्द की निशानी है, और शायर महबूब से कहता है कि अगर उसे अपने पैरों को मेंहदी की सुर्खी से सजाना है, तो वह बेझिझक उसकी ख़ून बरसाती आँखों पर क़दम रख दे। यह तसव्वुर दर्द और हुस्न को एक साथ पिरोता है, जहाँ आशिक़ का सारा रंज-ओ-ग़म महबूब के शृंगार में तब्दील हो जाता है।

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

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