जब तुझ अरक़ के वस्फ़ में जारी क़लम हुआ आलम में उस का नाँव जवाहर-रक़म हुआ

“When the pen flowed in praise of the pearls of sweat upon your brow, across the world its name became known as 'the writer of gems'.”

— वली दकनी
अर्थ

जब तुम्हारे पसीने की प्रशंसा लिखने में क़लम चली, तो पूरी दुनिया में उसका नाम 'जवाहरात लिखने वाली' पड़ गया।

विस्तार

इस शेर में शायर ने महबूब के चेहरे पर चमकीले पसीने की बूँदों को मोतियों जैसा अनमोल ठहराया है। वह कहते हैं कि जब मेरी क़लम ने तुम्हारी इस नाज़ुक ख़ूबसूरती की तारीफ़ लिखनी शुरू की, तो अल्फ़ाज़ ख़ुद-ब-ख़ुद कीमती नगीने बन गए और दुनिया भर में इस क़लम का नाम 'जवाहर-रक़म' यानी मोती तराशने वाला पड़ गया। यह महबूब के नूरानी हुस्न और अपनी शायरी के कमाल की एक बेहद दिलकश जुगलबंदी है।

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

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