जिन ने बयाँ लिखा है मिरे रंग-ए-ज़र्द का उस कूँ ख़िताब ग़ैब सूँ ज़र्रीं-रक़म हुआ

“Whoever penned the tale of my pale and sallow hue, was gifted from the Unseen the title 'Scribe of Golden Script'.”

— वली दकनी
अर्थ

जिस किसी ने मेरे पीले पड़े चेहरे के रंग का हाल लिखा, उसे ग़ैब (अदृश्य संसार) से 'सुनहरे अक्षरों वाला' (ज़र्रीं-रक़म) का ख़िताब मिला।

विस्तार

इस शे'र में इश्क़ के दर्द और उसकी चमक का बेहद खूबसूरत नाता जोड़ा गया है। हिज्र और जुदाई के ग़म में आशिक़ का चेहरा पीला (ज़र्द) पड़ जाता है, जो ज़ाहिरी तौर पर दुख और लाचारी की निशानी है। लेकिन शायर कहता है कि जिसने मेरे इस पीले चेहरे की दास्तान लिखी, उसे ग़ैब यानी अनदेखी ईश्वरीय दुनिया से 'ज़र्रीं-रक़म' (सोने की स्याही से लिखने वाले) का ख़िताब मिला। यह आशिक़ के गहरे दर्द को भी सोने जैसा क़ीमती और मुक़द्दस बना देने का नायाब अंदाज़ है।

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