न होवे उसे जग में हरगिज़ क़रार जिसे इश्क़ की बे-क़रारी लगे

“Never in this world shall that soul find repose, / Whosoever is touched by the unrest of love.”

— वली दकनी
अर्थ

जिस इंसान को प्रेम की बेचैनी लग जाती है, उसे इस संसार में कभी भी चैन या सुकून हासिल नहीं होता।

विस्तार

यह शेर इश्क़ के उस मीठे दर्द और बेचैनी को बेहद सादगी से बयां करता है। शायर कहते हैं कि जिसे एक बार मोहब्बत की यह तड़प लग जाए, उसे इस दुनिया का कोई भी सुख-चैन फिर रास नहीं आता। पर इश्क़ का जादू ही ऐसा है कि आशिक़ के लिए यह बेक़रारी किसी सज़ा जैसी नहीं, बल्कि दुनिया के तमाम झूठे सुकूँ से कहीं ज़्यादा अज़ीज़ होती है।

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