गीत सुनें
1
कमर उस दिलरुबा की दिलरुबा है
निगह उस ख़ुश-अदा की ख़ुश-अदा है
उस दिलरुबा (प्रेमिका) की कमर दिल को मोह लेने वाली है, और उस सुंदर अदाओं वाली की नज़र भी बेहद दिलकश है।
2
सजन के हुस्न कूँ टुक फ़िक्र सूँ देख
कि ये आईना-ए-मअ'नी-नुमा है
प्रियतम के सौंदर्य को ज़रा ध्यान और विचार से देखो, क्योंकि यह गहरे अर्थों को दर्शाने वाला आईना है।
3
ये ख़त है जौहर-ए-आईना-राज़
इसे मुश्क-ए-ख़ुतन कहना बजा है
चेहरे का यह नया ख़त (बारीक रोएँ) रहस्यों के आईने का जौहर है, और इसे खु़तन की कस्तूरी कहना पूरी तरह से उचित है।
4
हुआ मालूम तुझ ज़ुल्फ़ाँ सूँ ऐ शोख़
कि शाह-ए-हुस्न पर ज़िल्ल-ए-हुमा है
ऐ शोख़ महबूब, तुम्हारी ज़ुल्फ़ों को देखकर यह मालूम हुआ कि हुस्न के बादशाह पर हुमा परिंदे का मुबारक साया है।
5
न होवे कोहकन क्यूँ आ के आशिक़
जो वो शीरीं-अदा गुलगूँ-क़बा है
फ़रहाद (कोहकन) भला आकर आशिक़ क्यों न बने, जब वह महबूब शीरीं जैसी मीठी अदाओं वाला और गुलाबी लिबास पहने हुए है।
6
न पूछो आह-ओ-ज़ारी की हक़ीक़त
अज़ीज़ाँ आशिक़ी का मुक़तज़ा है
मेरी आहों और रोने की हक़ीक़त मत पूछो; ऐ प्यारे दोस्तों, यह तो आशिक़ी और मोहब्बत का स्वाभाविक तक़ाज़ा है।
7
'वली' कूँ मत मलामत कर ऐ वाइज़
मलामत आशिक़ों पर कब रवा है
ऐ नसीहत देने वाले (वाइज़), वली को बुरा-भला मत कह और उस पर दोष मत लगा; आशिक़ों को मलामत करना कब जायज़ रहा है?
Comments · 0
Free — just your email. You'll come right back here.
No comments yet. Be the first.
