सजन के हुस्न कूँ टुक फ़िक्र सूँ देख कि ये आईना-ए-मअ'नी-नुमा है

“Gaze upon the beloved's beauty with a contemplative eye, / For it is a mirror wherein inner meanings lie.”

— वली दकनी
अर्थ

प्रियतम के सौंदर्य को ज़रा ध्यान और विचार से देखो, क्योंकि यह गहरे अर्थों को दर्शाने वाला आईना है।

विस्तार

शायर यहाँ बड़ी नज़ाकत से कहते हैं कि महबूब के हुस्न को सिर्फ़ ऊपरी नज़र से नहीं, बल्कि ज़रा गहराई और सोच-विचार (फ़िक्र) के साथ देखना चाहिए। सूफ़ी रिवायत में महबूब का यह ज़ाहिरी रूप दरअसल एक ऐसा आईना है, जिसमें रूहानी सच्चाइयाँ और ख़ुदा का नूर साफ़ झलकता है। जब आप इश्क़ को सिर्फ़ आँखों से नहीं बल्कि दिल की गहराई से महसूस करते हैं, तो हर ख़ूबसूरती एक गहरा राज़ बयां करने लगती है।

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

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सजन के हुस्न कूँ टुक फ़िक्र सूँ देख | Sukhan AI