“This tender down is the sheen on the mirror of secrets; to call it the musk of Khotan is entirely just.”
चेहरे का यह नया ख़त (बारीक रोएँ) रहस्यों के आईने का जौहर है, और इसे खु़तन की कस्तूरी कहना पूरी तरह से उचित है।
इस शेर में शायर महबूब के चेहरे पर उभरते नाज़ुक सब्ज़े यानी हल्की दाढ़ी के रुए की ख़ूबसूरती को बेहद नफ़ासत से सराह रहा है। वह इस 'ख़त' को किसी ऐब की तरह नहीं, बल्कि राज़ छुपाए आईने पर खिंचा हुआ कुदरती जौहर मानता है जो चेहरे के हुस्न को और चमका देता है। इसे ख़ोतन के दुर्लभ और महकते कस्तूरी मुश्क के बराबर बताकर शायर यह जताना चाहता है कि यह नया निखार महबूब की कशिश को और भी मदहोश कर देता है।
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