देख ख़ूबाँ कूँ वक़्त मिलने के किस अदा सूँ सलाम करते हैं

“Behold the fair beauties at the hour of rendezvous— / With what exquisite grace they offer their salaam!”

— वली दकनी
अर्थ

मिलने के समय इन सुंदरियों को देखो कि वे किस अदा और नाज़-नख़रे से सलाम करती हैं।

विस्तार

यह शेर मुलाक़ात के उस दिलकश लम्हे की ख़ूबसूरती को बयां करता है जब महबूब अचानक सामने आ जाता है। शायर हैरानी और मुग्धता के साथ कहता है कि इन हसीनों के मिलने का अंदाज़ तो देखो, वे कितने नाज़ और नज़ाकत के साथ सलाम करते हैं। यह महज़ कोई रस्मी आदाब नहीं, बल्कि दिल मोह लेने की एक ऐसी मीठी अदा है जहाँ एक छोटा सा इशारा भी आशिक़ के दिल की धड़कनें बढ़ा देता है।

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

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