मुफ़्लिसी सब बहार खोती है मर्द का ए'तिबार खोती है

“Poverty strips away the bloom of spring, and robs a man of trust in everything.”

— वली दकनी
अर्थ

गरीबी जीवन की सारी खुशियों और रौनक को मिटा देती है, और इंसान का भरोसा व मान-सम्मान भी छीन लेती है।

विस्तार

यह शे'र ग़रीबी की उस कड़वी सच्चाई को बयां करता है जो इंसान से उसकी खुशियाँ और सम्मान दोनों छीन लेती है। यहाँ 'बहार' जीवन के उल्लास, रंगों और ताजगी का प्रतीक है, जो तंगहाली आते ही बेरंग हो जाती है। सबसे गहरा दर्द यह है कि दुनिया अक्सर इंसान की नीयत को उसकी जेब से तौलती है, और मुफ़्लिसी उसके आत्मसम्मान और समाज में उसकी साख तक को दांव पर लगा देती है।

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

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