सब्ज़ा-ओ-बर्ग-ओ-लाला रखते हैं शौक़ दिल में दवाम तुझ लब का

“The greenery, the leaf, and the tulip ever bear / In their heart an eternal longing for your lips.”

— वली दकनी
अर्थ

हरियाली, पत्ते और लाला के फूल हमेशा अपने दिल में तुम्हारे होंठों की चाहत रखते हैं।

विस्तार

शायर यहाँ पूरी कुदरत को महबूब के हुस्न का मुरीद दिखाते हैं, जहाँ बाग की हरी घास, नर्म पत्ते और सुर्ख लाला का फूल—सब महबूब के लबों की लाली और मिठास के दीवाने हैं। लाला के फूल का लाल रंग महबूब के लबों की याद का प्रतीक बन गया है, जिसके दिल में हमेशा के लिए यह प्यास बसी है। यह शेर बड़ी सादगी से यह अहसास कराता है कि सिर्फ इंसान ही नहीं, बल्कि पूरी कायनात महबूब की एक झलक और मुस्कुराहट की तलबगार है।

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

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