“Like a mere apprentice to the fine script of your down is the ruby, while your lip remains an ever-brimming cup of perpetual wine.”
तुम्हारा होंठ शराब का सदा भरा रहने वाला प्याला है, और तुम्हारे चेहरे के बारीक ख़त (रोओं) के सामने याक़ूत भी सिर्फ़ एक शागिर्द की तरह है।
इस ख़ूबसूरत शेर में शायर महबूब के होंठों की दिलकश तारीफ़ कर रहा है। यहाँ लफ़्ज़ 'याक़ूत' का दोहरा मज़ा है—यह लाल कीमती पत्थर भी है और इतिहास के एक मशहूर सुलेखकार (कैलिग्राफ़र) का नाम भी; शायर कहता है कि महबूब के होंठों के किनारे खिंची नाज़ुक लकीर के सामने याक़ूत भी महज़ एक नौसिखिया शागिर्द लगता है। वहीं, महबूब के होंठ हमेशा छलकते हुए शराब के ऐसे प्याले की तरह हैं, जो देखने वाले को हर पल अपनी मस्ती में डुबोए रखते हैं।
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