ग़रज़ गोयाँ की बाताँ कूँ न ला ख़ातिर मनीं हरगिज़ सजन इस बात कूँ ख़ातिर में ला आहिस्ता आहिस्ता

“Never take to heart the idle talk of gossipers; / But let this truth, beloved, steal gently into your heart.”

— वली दकनी
अर्थ

मतलबी लोगों की बातों पर कभी ध्यान मत दो; ऐ महबूब, मेरी इस बात को धीरे-धीरे अपने दिल में जगह दो।

विस्तार

शायर अपने महबूब को बड़ी मोहब्बत और नज़ाकत से समझा रहे हैं कि मतलबी और बदनीयत लोगों की बातों पर बिल्कुल ध्यान न दें, क्योंकि उनका मक़सद सिर्फ़ दूरियाँ पैदा करना होता है। इसके उलट, सच्चे प्यार और अपनेपन के इस एहसास को बिना किसी जल्दबाज़ी के, आहिस्ता-आहिस्ता अपने दिल में उतरने दें। यह शेर दुनिया के बेवजह शोर और मोहब्बत की शांत, सहज गहराई के बीच एक बहुत प्यारा फ़र्क़ दिखाता है।

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

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