गुल के ख़्वाहाँ तो नज़र आए बहुत इत्र-फ़रोश तालिब-ए-ज़मज़मा-ए-बुलबुल-ए-शैदा न मिला

“Many perfumers were seen seeking the rose, yet none was found who longed for the song of the enraptured nightingale.”

— अकबर इलाहाबादी
अर्थ

फूल चाहने वाले बहुत से इत्र बेचने वाले तो दिखाई दिए, लेकिन दीवाने बुलबुल के गीतों का कोई चाहने वाला नहीं मिला।

विस्तार

यह शेर दुनिया के मतलबी रवैये और सच्ची मोहब्बत के फ़र्क़ को ख़ूबसूरती से बयां करता है। इत्र बेचने वाले गुलाब को सिर्फ़ इसलिए चाहते हैं ताकि उसकी ख़ुशबू निचोड़कर बाज़ार में बेच सकें, यानी उन्हें हुस्न की क़दर सिर्फ़ अपने फ़ायदे के लिए है। अफ़सोस यह है कि उस दीवाने बुलबुल के दर्द और उसकी सच्ची पुकार को सुनने वाला कोई नहीं मिलता, जो बिना किसी लालच के अपनी रूह के गीत गा रहा है।

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

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