ख़ूब उम्मीदें बंधीं लेकिन हुईं हिरमाँ नसीब बदलियाँ उट्ठीं मगर बिजली गिराने के लिए

“High hopes were bound, yet despair became our lot; the clouds arose, only to strike down with lightning.”

— अकबर इलाहाबादी
अर्थ

बहुत सी उम्मीदें बंधी थीं लेकिन अंत में केवल निराशा ही नसीब हुई; बादल भी छाए, मगर सिर्फ़ बिजली गिराने के लिए।

विस्तार

यह शेर उम्मीद और उससे जुड़ी गहरी मायूसी को बड़े ख़ूबसूरत अंदाज़ में बयां करता है। आसमान में जब काली घटाएं छाती हैं, तो दिल में राहत और प्यार की बारिश की आस जागती है, मगर इस बदनसीब के हिस्से में बस तबाही की बिजली आई। शायर कहना चाहते हैं कि ज़िंदगी का सबसे बड़ा दर्द यह है कि कभी-कभी उम्मीदें सिर्फ़ इसलिए बंधती हैं ताकि हमें और भी बेदर्दी से तोड़ा जा सके।

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