“Charmed by the contrivance of breath, the dust fell deeply in love; it imprisoned itself just to hold it close to its chest.”
मिट्टी को साँस लेने के हुनर या तरकीब से प्यार हो गया, और उसने साँस को अपने सीने से लगाने के लिए खुद को ही क़ैद कर लिया।
इस शे’र में इंसान की पैदाइश को मिट्टी और साँस यानी रूह की एक बेहद ख़ूबसूरत प्रेम-कहानी की तरह पेश किया गया है। बेपरवाह बिखरने वाली मिट्टी को साँसों के हुनर से ऐसा इश्क़ हुआ कि उसने ख़ुद को एक जिस्म के दायरे में क़ैद कर लिया, ताकि वह ज़िंदगी को अपने सीने से लगा सके। यह शे’र हमें बताता है कि हमारा यह नश्वर वजूद कोई मजबूरी नहीं, बल्कि रूह को गले लगाने की एक बेहद हसीन ख़्वाहिश है।
Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.
ऑडियो
Free — just your email. You'll come right back here.
No comments yet. Be the first.
