“Where is that playful dance of glances now? My eyes stay closed; No life is left within me anymore to give my heart away.”
अब नज़रें मिलाने का वह शौक कहाँ रहा, आँखें तो बंद ही रहती हैं। दिल लगाने के लिए अब जान ही बाकी नहीं बची है।
शायर यहाँ अपने उस दौर को याद कर रहा है जब नज़रों का मिलना और छेड़खानी दिल को एक नई ताज़गी देती थी, मगर अब वो सारा शोख़ी-भरा ज़माना गुज़र चुका है। आँखों का बंद रहना केवल शारीरिक थकान नहीं, बल्कि ज़ख्मों और हादसों से चूर उस रूह की बेबसी है जो अब किसी नए रिश्ते की धूप नहीं सह सकती। इश्क़ करने के लिए सीने में जो हौसला और ज़िंदादिली चाहिए होती है, जब वही दम तोड़ दे तो दिल इस खेल से हमेशा के लिए किनारा कर लेता है।
Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.
ऑडियो
Free — just your email. You'll come right back here.
No comments yet. Be the first.
