ग़ैरों को अपने हाथ से हँस कर खिला दिया मुझ से कबीदा हो के कहा पान लीजिए

“With a smile she fed the strangers from her own hand / Sullen and cold, to me she said, 'Take the betel leaf.'”

— अकबर इलाहाबादी
अर्थ

महबूब ने ग़ैरों को तो मुस्कुराते हुए अपने हाथों से पान खिला दिया, लेकिन मुझसे नाराज़ होकर बस रूखेपन से कहा कि पान लीजिए।

विस्तार

तहज़ीब में अपने हाथों से किसी को पान खिलाना बेहद प्यार और खास अपनेपन की निशानी माना जाता है। लेकिन आशिक़ की तकलीफ़ देखिए—माशूक़ ने ग़ैरों को तो हँसते-हँसते अपने हाथों से पान खिला दिया, मगर सच्चे चाहने वाले की बारी आई तो मुँह फुलाकर रुखेपन से कहा कि 'पान लीजिए'। यह शेर महबूब की जानबूझकर की गई बेरुखी, उसकी शोखी और आशिक़ के दिल के मीठे शिकवे को बहुत ख़ूबसूरती से दर्शाता है।

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

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