डर है मेरी ज़बाँ न खुल जाए अब वो बातें बहुत बनाने लगे

“I fear lest my silence break and my tongue speak out, for they have begun to weave too many tales.”

— अल्ताफ़ हुसैन हाली
अर्थ

मुझे डर है कि कहीं मेरी ज़बान न खुल जाए, क्योंकि अब वे बहुत बातें और बहाने बनाने लगे हैं।

विस्तार

इस शेर में ख़ामोशी और सच के बीच की एक नाज़ुक कशमकश दिखाई देती है। शायर ने महबूब के भरम और इज़्ज़त को बचाने के लिए अब तक अपने होंठ सिले रखे हैं, मगर जब सामने वाला हद से ज़्यादा झूठी बातें और बहाने बनाने लगे तो सब्र का पैमाना छलकने लगता है। डर इस बात का नहीं कि बात बिगड़ जाएगी, बल्कि यह है कि सच ज़ुबान पर आ गया तो महबूब का वो चेहरा बेनक़ाब हो जाएगा जिसे शायर हमेशा दुनिया से छुपाना चाहता था।

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

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