फ़रेब-ए-वादा-ए-दिलदार की क़द्र
शहीद-ए-ख़ंजर-ए-इंकार से पूछ
“Ask the true worth of the beloved's false promise / From the martyr slain by the dagger of denial.”
— अल्ताफ़ हुसैन हाली
अर्थ
महबूब के झूठे वादे की क़ीमत उस शख़्स से पूछो जो उसके इनकार के ख़ंजर से शहीद हुआ है।
विस्तार
इस शेर में शायर ने महबूब के झूठे वादे और साफ़ इनकार के दर्द का बहुत दिलकश मुक़ाबला किया है। महबूब का झूठा वादा चाहे छलावा ही सही, पर वह दिल को एक मीठी उम्मीद और जीने का सहारा तो देता है। इस धोखे की असली क़ीमत वही आशिक़ समझ सकता है, जिसके सीने पर साफ़ इनकार का बेरहम ख़ंजर चल चुका हो और उम्मीद की हर किरण बुझ गई हो।
Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.
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