“If true devotion dwells within the heart, O Khizr, what need has the wayfarer of any guide?”
ऐ ख़िज़्र, अगर दिल में चाहत और लगन की सच्ची तड़प हो, तो मुसाफ़िर को किसी रहनुमा या मार्गदर्शक की कोई ज़रूरत नहीं होती।
इस शेर में हज़रत ख़िज़्र—जो भटके हुए मुसाफ़िरों को रास्ता दिखाने के लिए जाने जाते हैं—को मुख़ातब करते हुए एक बेहद ख़ूबसूरत बात कही गई है। शायर का मानना है कि अगर सीने में मंज़िल को पाने की सच्ची तड़प और नीयत की पाकीज़गी हो, तो किसी रहनुमा या मार्गदर्शक की दरकार नहीं रहती। इंसान की अपनी सच्ची लगन ही वह रौशनी बन जाती है जो पथरीले और अनजान रास्तों पर भी उसे भटकने नहीं देती।
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