हाजियो है हम को घर वाले से काम घर के मेहराब ओ सुतूँ से क्या ग़रज़

“O pilgrims, our concern is with the Master of the house; what care have we for its arches and pillars?”

— अल्ताफ़ हुसैन हाली
अर्थ

हे हाजियों, हमारा वास्ता तो घर के मालिक (ईश्वर) से है; हमें उस घर की मेहराबों और खंभों से क्या लेना-देना?

विस्तार

इस शेर में शायर हज पर जाने वाले मुसाफ़िरों से मुख़ातब होकर ज़ाहिरी रस्मों और सच्ची रूहानियत का फ़र्क़ समझाते हैं। वे कहते हैं कि हमारी तड़प तो 'घर वाले' यानी ख़ुद ख़ुदा से है, न कि उस घर (काबा) के मेहराबों और खंभों जैसी बाहरी बनावट से। यह शेर हमें याद दिलाता है कि इबादत का असली मक़सद पत्थरों या इमारतों की ताज़ीम नहीं, बल्कि सीधे अपने महबूब-ए-हक़ीक़ी से दिल जोड़ना है।

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

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