गुनगुना कर आप रो पड़ते हैं जो उन को चंग ओ अरग़नूँ से क्या ग़रज़

“Those who dissolve in tears merely humming to themselves—what need have they of the harp or the organ?”

— अल्ताफ़ हुसैन हाली
अर्थ

जो लोग खुद ही कुछ गुनगुना कर रो पड़ते हैं, उन्हें चंग और अरग़नून जैसे वाद्य-यंत्रों और संगीत के साज़ों से क्या लेना-देना।

विस्तार

यह शेर एक ऐसे गहरे और सच्चे दर्द की तस्वीर खींचता है, जिसे महसूस करने के लिए किसी बाहरी साज़ की ज़रूरत नहीं होती। शायर कहते हैं कि जो इंसान तन्हाई में ज़रा सा गुनगुना कर ही रो पड़े, उसका दिल खुद दर्द का सबसे सच्चा तराना बन चुका है। ऐसे संवेदनशील लोगों के लिए चंग या अरग़नूँ जैसे बड़े साज़ बेमानी हैं, क्योंकि उनकी अपनी ख़ामोश टीस ही सबसे मुकम्मल मौसीक़ी है।

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

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