मिट गए तेरे मिटाने के निशाँ भी अब तो ऐ फ़लक इस से ज़ियादा न मिटाना हरगिज़

“Even the traces of your ruination have faded away by now; O sky, seek not to erase me any further than this.”

— अल्ताफ़ हुसैन हाली
अर्थ

अब तो तेरे मिटाने के निशान भी पूरी तरह मिट चुके हैं, इसलिए ऐ आसमान! अब मुझे इससे ज़्यादा हरगिज़ मत मिटाना।

विस्तार

इस शेर में शायर आसमान यानी अपनी बेरहम तक़दीर से मुख़ातब होकर दिल का हाल बयां कर रहा है। वह कहता है कि ज़माने की गर्दिशों ने उसे इतना मिटाया है कि अब तो उन ज़ख़्मों और तबाही के निशान भी बाकी नहीं रहे, यानी उसका वजूद ही गुम हो चुका है। यह बेबसी से भरी एक ऐसी दर्दनाक फ़रियाद है, जहाँ शायर तक़दीर से गुज़ारिश करता है कि जब कुछ बचा ही नहीं, तो अब और ज़ुल्म ढाने का क्या फ़ायदा।

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

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