कभी ऐ इल्म ओ हुनर घर था तुम्हारा दिल्ली हम को भूले हो तो घर भूल न जाना हरगिज़

“O learning and art, Delhi was once your home; though you have forgotten us, never forget your home.”

— अल्ताफ़ हुसैन हाली
अर्थ

ऐ ज्ञान और कला, कभी दिल्ली तुम्हारा घर हुआ करता था; भले ही तुम हमें भूल गए हो, लेकिन अपने इस घर को कभी मत भूलना।

विस्तार

यह शेर दिल्ली के गौरवशाली इतिहास और उसकी सांस्कृतिक विरासत की एक बेहद भावुक पुकार है। शायर यहाँ ज्ञान और कला (इल्म-ओ-हुनर) को एक बिछड़े हुए अज़ीज़ की तरह मुख़ातब करते हुए याद दिलाता है कि कभी दिल्ली ही तुम्हारा असली आशियाना हुआ करती थी। दर्द और नज़ाकत से भरी यह इल्तिजा कहती है कि भले ही आज हालात बदल गए हों और तुम हम बाशिंदों को भूल गए हो, लेकिन अपनी रूहानी सरज़मीं और अपने घर को कभी मत बिसराना।

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

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