“Poetry is dead, my friends, never to breathe again; fret your heart no longer now, recalling it in vain.”
हे दोस्तो, शाइरी अब मर चुकी है और दोबारा ज़िंदा नहीं होगी, इसलिए उसे याद कर-करके अपना दिल बिल्कुल मत दुखाना।
इस शेर में शायर बहुत ही बेबसी और गहरे तंज़ के साथ कहता है कि सच्ची शाइरी और जज़्बात का दौर अब ख़त्म हो चुका है, इसलिए उसके गुज़रे ज़माने को याद करके दिल जलाने का कोई फ़ायदा नहीं। बज़ाहिर यह दोस्तों को आगे बढ़ने की एक साफ़ सलाह लगती है, लेकिन इसके पीछे असली हुस्न और अदब के मिट जाने का गहरा मातम छुपा है। यह उस बेबस आशिक़-ए-सुख़न की आवाज़ है जो दुनिया की बे-ज़ौक़ी से थक चुका है।
Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.
ऑडियो
Free — just your email. You'll come right back here.
No comments yet. Be the first.
